संग्रहालय तकनीक क्लब

Museum

संग्रहालय विभाग बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां/कार्यशालाओं का आयोजन करता है, जो मुख्यत: तीन प्रकार की है:-

  1. संग्रहालय आधारित गतिविधियां / कार्यशालायें।

  2. थीम आधारित गतिविधियां / कार्यशालायें।

  3. अभिरूचि आधारित गतिविधियां / कार्यशालायें।

ऊपर उल्लिखित कार्यक्रमों की प्रथम श्रेणी के अन्तर्गत जैसे सूर्य सप्ताह, संग्रहालय सप्ताह तथा विरासत सप्ताह का आयोजन किया जाता है।

- थीम आधारित गतिविधियों / कार्यशालाओं की द्वितीय श्रेणी के अन्तर्गत जैसे मिनीएचर पेंटिंग, अनुरक्षण एवं प्रतिरक्षण, ‘मोल्डिंग व कास्टिंग’ आदि विषयों पर गतिविधि / कार्यशालायें आयोजित की जाती हैं।

- अभिरूचि आधारित गतिविधियों के श्रेणी के अन्तर्गत जैसे ‘अपनी संस्कृति को पहचाने’, ‘आइये अतीत में झांके’ आदि जैसी गतिविधियां / कार्यशालायें आयोजित की जाती हैं।

सूर्य सप्ताह
“‘सूर्य सप्ताह’” का आयोजन इस संग्रहालय की स्थायी प्रदर्शनी पर आधारित एक कार्यक्रम है। संग्रहालय द्वारा यह कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। सप्ताहभर चलने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य हैं -:-

  • बच्चों को ऊष्णा और ऊर्जा के मूल स्रोत, जैसे कि सूर्य और इससे संबंधित समस्त पहलुओं पर उन्हें विस्तृत जानकारी प्रदान करना।

  • सहभागियों को गतिविधियों/व्यावहारिक अनुभव आदि के माध्यम से सूर्य के सम्बंध में विभिन्न विशिष्टताओं को समझाने का अवसर प्रदान करना।

  • बच्चों को न केवल ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोतों के बारे में न केवल जागरूक करना अपितु उन्हें स्वयं इन्हें इस्तेमाल करने का मौका प्रदान करना भी है।


सप्ताहभर चलने वाला कार्यक्रम पूर्व-परीक्षा के साथ प्रारम्भ होता है और तदउपरान्त ‘सूर्या’ प्रदर्शनी में प्रशिक्षण और इसका दौरा कराया जाता है। इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सूर्य से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं से विस्तार पूर्वक रूबरू कराया जाता है, जिसमें आकाशमंडल विषय पर पर विद्वानों के साथ विचार-विमर्श तथा तारामंडल और प्राचीन वैद्यशालाओं जैसे जन्तर-मन्तर एवं गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत केन्द्र आदि में उनका भ्रमण कराना शामिल है। इसके साथ ही बच्चे अपना खाना बनाने के लिए सौर ऊर्जा का स्वयं उपयोग करने का अवसर पर प्राप्त करते हैं। प्रशिक्षण उपरान्त बच्चों की परीक्षा के साथ कार्यक्रम समाप्त होता है। परीक्षा-पूर्व और परीक्षा-उपरान्त परिणामों से संग्रहालय के कार्यक्रम व गतिविधियों में सुधार लाने में सहायता मिलती है।

संग्रहालय सप्ताह
राष्ट्रीय बाल संग्रहालय ‘‘विश्व संग्रहालय दिवस’’ के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष मई/जून के महीने में संग्रहालय सप्ताह का आयोजन करता है ताकि बच्चे अपने जीवन में संग्रहालयों उनके स्वरूप एवं उपयोग के महत्व की जान सके और उनमें जागरूकता आये। इन कार्यक्रमों में ‘‘आइये संग्रहालयों के उपयोग की संभावनायें तलाशें’’ जैसे आयोजन किए जाते हैं। राष्ट्रीय बाल संग्रहालय का विश्वास है कि कोई भी ‘‘संग्रहालय’’ वस्तुत: तब तक एक भण्डार-गृह मात्र ही है जब तक कि यह अपने संग्रह के माध्यम से आगन्तुकों के बीच जानकारी का प्रसार नहीं करना। सप्ताह पर्यन्त चलने वाले इस कार्यक्रम में स्लाईड शो के जरिए संग्रहालयों के विभिन्न प्रकार तथा विभिन्न संग्रहालयों से आने वाले विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के अवसर के जरिए बच्चों को सुविज्ञ किया जाता है। विभिन्न प्रकार के इन संग्रहालयों के माध्यम से बच्चे स्वयं भी संभावनाओं को तलाशते हैं और सांस्कृतिक विरासत एवं अतीत के वैभव के साथ-साथ पारंपरिक कला एवं शिल्प आदि के सम्बंध में विभिन्न पहलुओं का ज्ञान प्राप्त करने है। वे इससे यह भी सीखते हैं कि बच्चे इन संग्रहालयों के माध्यम से अपने स्कूल की गतिविधियों में अनुपूरक अथवा पूरक जानकारी प्रदत्त करके दिन-प्रति-दिन के अपने जीवन से सम्बंधित विभिन्न विषयों को समझने में मदद कर सकते हैं।

थीम आंतरिक कार्यशालायें
राष्ट्रीय बाल संग्रहालय द्वारा निम्न प्रकार की थीम आधारित कार्यशालाओं का संचालन किया जाता है :-

  • मिनिएचर पेंटिंग।

  • पारम्परिक पेंटिंग जैसे वर्ली, मधुबनी आदि।

  • स्मारकों का अनुरक्षण एवं परिरक्षण।

  • मोल्डिंग एवं कास्टिंग कार्यशालायें (अनुकृतियां बनाना)


ऐसी थीम आधारित कार्यशालाओं के मुख्य उद्देश्य है :-

  • बच्चों को उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना।

  • बच्चों के बीच पारंपरिक कला एवं शिल्प के प्रति चेतना का निर्माण करना और

  • और उन्हें अपनी विरासत के अनुरक्षण व परीरक्षण के प्रति प्रोत्साहित करना और देश में विलुप्त हो रहे कला और शिल्प को जारी रखने में सहयोग करना।


विरासत सप्ताह
राष्ट्रीय बाल संग्रहालय प्रत्येक वर्ष अपै्रल माह में ‘‘विश्व विरासत दिवस’’ का आयोजन करता है, जिसका उद्देश्य बच्चों को यह महसूस कराना है कि सांस्कृतिक विरासत उनकी है और उनका यह दायित्व है कि इन स्मारकों का अनुरक्षण और परिरक्षण करना उनका मूलभूत कत्र्तव्य है और ये स्मारक गौरवशाली अतीत के प्रतीक हैं। सप्ताह पर्यन्त चलने वाले इस कार्यक्रम में विचार-विमर्श, स्लाईड शो, प्रश्नोत्तरी कार्यक्रमों, विश्व सांस्कृतिक विरासत की सूची में दर्ज कतिपय महत्त्वपूर्ण स्मारकों का (गाईड के साथ) भ्रमण कराया जाता है। इसके अलावा, इस सप्ताह में पेंटिंग और क्ले मॉडलिंग गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं, जिनमें बच्चे स्मारक बनाकर अथवा क्ले/सफेद चाक मिट्टी आदि से अपने मॉडल तैयार करते हैं। ऐसा करके वे उक्त उद्देश्यों की पूर्ति करने का प्रयास करने के साथ-साथ वे इस काल विशेष की कला और वास्तुशिल्प की मुख्य-मुख्य विशेषताओं को अनजाने में ही सीख जाते हैं।

राष्ट्रीय बाल संग्रहालय द्वारा शिक्षेत्तर आधारित निम्नलिखित कार्यक्रम संचालित किए जाते है :- •

  • ‘‘आइये अपनी सभ्यता को जानें’’

  • ‘‘आइये (लेट्स.......पा) के साथ यात्रा करें,’’ आइये अतीत के झरोखे में झांकें।

    ( इस कार्यक्रम के अन्तर्गत बच्चे प्रत्येक बार इतिहास के विभिन्न काल खण्डों की जानकारी हासिल करते हैं )


उद्देश्य:-

  • बच्चे की अभिरूचि वाली विषय-वस्तु के अनुरूप उन्हें अध्ययन का आनन्द दिलाना।

  • बच्चों की पुस्तकों में विभिन्न अध्ययन की संकल्पनाओं के साथ दिन-प्रतिदिन के जीवन के अनुभव को जोड़ना।


संग्रहालय विभाग विभिन्न अध्ययन कार्यक्रमों का भी आयोजन करना है, जिसमें ऐतिहासिक स्थानों पर खुदाई के स्थल एवं हमारे अतीत और वर्तमान से सम्बंधित अन्य सामग्री से उन्हें रूबरू कराया जाता है ताकि वे अपनी शिक्षणेत्तर क्रियाकलाप से संबंधित विषयों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर सकें।
मई/जून महीनों में ग्रीष्म-सत्र के दौरान, विख्यात शिल्पकारों को राष्ट्रीय बाल भवन में अपनी कृतियां प्रदर्शित करने के लिए आमन्त्रित किया जाता है और वे बच्चों को अपनी विशिष्ट कला और शिल्प के बारे में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, संग्रहालय गैलरी में गतिविधियों की परिकल्पना का केन्द्र-बिन्दु अत्यधित गतिशील बन चला है, जहां बच्चों के सृजनात्मक प्रयास उनके बन चला है, जहां बच्चों के सृजनात्मक प्रयास उनके उत्कृष्टम स्थिति को प्राप्त होते हैं। राष्ट्रीय बाल भवन भी इन कलाओं के प्रति चिन्ता बनाए है, जो लुप्त होने के कगार पर हैं। अतएव, इन कला और शिल्प को अगली पीढी को हस्तांतरित करने के सतत् प्रयास किए जा रहे है।
बाल भवन द्वारा आयोजित की जाने वाली कतिपय कार्यशालायें निम्नानुसार हैं :-

  • सांझी पेंटिंग

  • वरेली पेंटिंग

  • आदिवासी कला

  • ग्लास पेंटिंग

  • कलमकारी

  • लैदर पेंटिंग और कठपुतली

  • पटट् चित्र

  • शोला पीठ से सम्बंधित आर्ट वर्क

  • टेराकोटा

  • कांस का शिल्प

  • पतंग बनाना

  • कंठा

  • फुलकारी कढाई

  • गुजरात की शिल्पकारी

  • बेंत से कार्य

  • दृष्टिबाधित बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम

समाज के निम्नतम वर्ग के बच्चों के लिए गैर-औपचारिक शैक्षिक कार्यशालायें भी आयोजित की जाती हैं ताकि वे ‘‘खेल-खेल’’ से सीखने के लिए प्रोत्साहित हो सकें।