राष्ट्रीय बाल संग्रहालय

Children Museum

 


सामान्य तौर पर यह विश्वास किया जाता है कि संग्रहालय मूल रूप से अनुसंधानकत्र्ताओं अथवा वयस्कों की दिलचस्पी के लिए होते हैं, जिससे अधिकांश लोग संग्रहालयों में जाते हैं। किंतु प्राय: हम यह भूल जाते हैं कि अन्य एक वर्ग ऐसा भी है, जिनके पास विविध स्वरूप का निजी संग्रह होने के साथ-साथ पर्याप्त रूप से सुसज्जित रहते हैं और उनका संग्रह पूर्णत: निजी होता है। स्पष्टत: यह समूह बच्चों का होता है, जिनका संग्रह इतना विशिष्ट होता है कि प्रत्येक बच्चा/चीजों के अपने निजी संग्रह को प्यार से सहेजता हैं और उनके लिए यह विशेष निधि होता है। आसपास की दुविधा की खोज की जरूरत, प्रत्येक घटना के पीछे कारण खोजने की ललक और अन्य सामान्य विशेषताओं के चलते प्रत्येक बच्चे में सृजन के विशेष गुण होते हैं। बच्चों में इन गुणों को विकसित करने में संग्रहालय महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। अतएव यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि युवाओं के एक विशेष वर्ग के लिए विशेष संग्रहालय होना चाहिए। वस्तुत: संग्रहालय होना चाहिए। वस्तुत: समय की मांग है कि संग्रहालय अनौपचारिक शिक्षा का एक घटक बन गए हैं अर्थात एक ऐसा स्थान जहां बच्चे पुस्तकों के भार, परीक्षा की अनिवार्यता एवं शिक्षा की औपचारिक व्यवस्था के बगैर भी ज्ञान हासिल कर सकें। राष्ट्रीय बाल भवन में राष्ट्रीय बाल संग्रहालय इसका अभिन्न अंग है और बच्चों के मनोविज्ञान और अपने इर्द-गिर्द देखने की उनकी प्रवृत्ति पर विचार करने के उपरान्त युवाओं के विशेष वर्ग के लिए इस आयोजना तैयार की गई है। यहाँ संग्रहालय में प्रस्तुत वस्तुओं के साथ-साथ सहभागी गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं, बच्चे प्रयोग, अवलोकन एवं विश्लेषण करने के लिए स्वतन्त्र होते हैं।

इस संग्रहालय में ऐसी वस्तुओं का समृद्ध संग्रह है जो बच्चों को आकर्षित करते हैं जैसे विभिन्न देशों के खिलौने और गहने, पाषाण और कांस्य की वस्तुएं, परम्परागत जेवरात, बर्तन, कला और शिल्प की वस्तुएं, वाद्य यंत्र, हैड गेवर, विभिन्न देशों के सिक्के आदि। राष्ट्रीय बाल भवन का राष्ट्रीय बाल संग्रहालय अपनी किस्म को अकेला संस्थान है और हमें राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है तथा यह ज्ञान के विस्तार तथा प्रसार के रूप में बच्चों के संग्रहालयों के महत्व और उपादेयता की हिमायत करता रहा है।

राष्ट्रीय बाल भवन विभिन्न थीम पर अनेक कार्यशालाओं एवं सेमिनारों का आयोजन ऐसे नवोन्मेषी ढंग से करता है कि सर्वाधिक प्रभावी ढंग से अपेक्षित अनौपचारिक अध्यययन सम्पन्न हो सकें। इसी प्रकार संग्रहालय बच्चों को कलाकार, शिल्पकार, निष्पादक अथवा वैज्ञानिक के रूप में अपनी क्षमता का आभास करने में विभिन्न विषयों पर कार्यशालाओं का आयोजन करके अनेक अवसर प्रदान करता है। वस्तुत: संग्रहालय ने ऐसी उर्वरा भूमि उपलब्ध कराई है, जहां जिज्ञासा का बीज अंकुरित होने तथा बच्चों को उनकी सृजनात्मक सामथ्र्य के अनुरूप लाभ मिलने की सम्भावना रहती है।

राष्ट्रीय संग्रहालय में इसकी गैलरियों में दो प्रकार की प्रदर्शनियां हैं :-

1.स्थायी प्रदर्शनियां और

2.अस्थायी प्रदर्शनियां, जहां समय-समय पर थीम आधारित प्रदर्शनियां लगाई जाती है।

स्थायी प्रदर्शनियां


निम्नलिखित स्थायी प्रदर्शनियां, जो संग्रहालय का मुख्य आकर्षण है।


हमारा भारत : हमारा भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय जीवन , अपने धड़कते संस्कृति, समृद्ध कला और शिल्प, रीति-रिवाज और धार्मिक , हमारी समृद्ध संस्कृति की झलक और प्रगति की विविधता का एक विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है।

सूर्या : वर्ष 1996.97 में स्थापित की गई सूर्या गैलरी विश्व में अपनी किस्म की इकलौती प्रदर्शनी है। इसमें ‘सूर्य’ को न केवल भारतीय संस्कृति के सन्दर्भ में दर्शाया गया है, अपितु ‘सूर्य’ की संकल्पना अन्य देशों/संस्कृतियों को भी अपने कलेवर में समेटे है,जहां इसे महिमामंडित किया गया है, जिनमें इजिप्ट, मेसोपोटेमिया, चीन, ग्रीस आदि शामिल हैं।

गौरव गाथा : श्रीमती सुशीला पटेल गोखले द्वारा सृजित इस गैलरी में भारतवर्ष के गौरवशाली अतीत, इसकी संस्कृति, इसके युद्ध और विजयश्री, इसके गौरव और रीति-रिवाजों को दर्शाने वाली संक्षिप्त झलकियों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई है। इसमें स्वतन्त्रता संग्राम, समाज सुधारों, महान नेताओं और इनमें सबसे बढ़कर सम्प्रति अनेका में एकता की भावना अन्र्तनिहित हैं।


अस्थायी प्रदर्शनियों

इस गैलरी जहां विषय आधारित प्रदर्शनियों समय -समय पर लगाई जाती है। इस गैलरी में बच्चों के रचनात्मक कार्यों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। यह प्रदर्शनियों हर साल लगाई जाती है। प्रदर्शनियों पूरी तरह से बच्चों की रचनात्मकता के लिए समर्पित है